श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

कुछ खंडहर है वहाँ

आलेख25/1/20261 मिनट पढ़ने का समय

 कुछ खंडहर है वहाँ, जहाँ कभी बस्ती हुआ करती थी,

आँगन गुलज़ार थे और खूब मस्ती हुआ करती थी,

बाशिंदों में था अपनापन 

और मुहब्बत बेपनाह थी 

दुश्मनी बहुत महँगी और दोस्ती सस्ती हुआ करती थी 

कुछ खंडहर है वहाँ, जहाँ कभी बस्ती हुआ करती थी


बूढ़ा बरगद आज भी खड़ा है वहाँ 

बर्बाद ए बस्ती का गवाह बनकर 

परिंदों तक ने छोड़ा आशियाँ अपना,

पेड़ की हर टहनी उनसे आबाद हुआ करती थी

कुछ खंडहर है वहाँ, जहाँ कभी बस्ती हुआ करती थी…

हेमंत वर्मा…

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