श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

शारदे माँ

आलेख25/1/20261 मिनट पढ़ने का समय

 सरस्वती माँ! वागेश्वरी जय, विभूति वीणा वादिनी जय।


शारदे माँ! सुमति सद्ज्ञान, संचरित तू ही करती है।

ज्ञान की ज्योति से ब्रह्माण्ड, प्रकाशित तू ही करती है।


जगत आद्यंत व्यापिनी जय,

तमस हरिणी, ज्योतिर्मय जय।

धवल वसना, हंसासिनी जय,

कमल नयनी, कमलासिनी जय।


प्राणियों के कंठों में स्वर समाहित, तू ही करती है।

शारदे माँ! धी, प्रज्ञा, ज्ञान, संचरित तू ही करती है।

डॉ मृदुल कीर्ति

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