श्री देशना संग्रह
वैज्ञानिक भोजन के बारे में क्या कहते हैं?
— नीलमकांत जीवमित्र
वैज्ञानिक भोजन के बारे में क्या कहते हैं?
हमारे जीवन के लिये भोजन आवश्यक तत्व है। हम प्रतिदिन क्या खाते हैं, इसका असर केवल हमारी भूख और स्वाद पर नहीं, बल्कि हमारे हृदय, पाचन-तंत्र, शरीर के वजन, दीर्घकालिक रोगों, पर्यावरण और अंततः पूरे जीव-जगत पर पड़ता है। यही कारण है कि आज दुनिया भर में भोजन और स्वास्थ्य के संबंध पर हजारों वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं।
इन शोधों से एक महत्वपूर्ण दिशा स्पष्ट होती जा रही है—साबुत अनाज, दालें, फलियाँ, फल, सब्जियाँ, मेवे और बीजों से भरपूर पौध-आधारित आहार स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों के लिए अधिक लाभकारी है।
🌿 ❗पौध-आधारित भोजन और फाइबर❗-
पौध-आधारित खाद्य पदार्थों की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है—Dietary Fibre (आहार रेशा)।
दालें, चना, राजमा, लोबिया, सोयाबीन, साबुत अनाज, फल, सब्जियाँ, मेवे और बीज फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इसके विपरीत मांस और अंडे जैसे पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में आहार फाइबर लगभग नहीं होता। दूध में भी नहीं होता।
जबकि पर्याप्त फाइबर का सेवन बेहतर पाचन, स्वस्थ gut microbiome, LDL cholesterol के नियंत्रण तथा कई chronic diseases के कम जोखिम से जुड़ा पाया गया है।
📚(Research: World Health Organization (WHO) — “Carbohydrate intake for adults and children: WHO guideline”, 2023; तथा अनेक systematic reviews और meta-analyses।)
❤️❗ Plant Protein और हृदय स्वास्थ्य❗-
हार्वर्ड T.H. Chan School of Public Health के नेतृत्व में लगभग 2.03 लाख लोगों पर 30 वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। जिन लोगों के आहार में plant protein की तुलना में animal protein का अनुपात अधिक था, उनकी तुलना में plant protein का अनुपात अधिक रखने वालों में cardiovascular disease का जोखिम 19% और coronary heart disease का जोखिम 27% कम पाया गया। शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से बताया कि यह लाभ मुख्यतः red और processed meat को nuts तथा legumes जैसे plant-protein sources से replace करने से जुड़ा था। इसके अतिरिक्त, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, पौधे आधारित प्रोटीन न केवल कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं, बल्कि धमनियों (arteries) में सूजन (inflammation) को घटाकर दिल के दौरों के खतरे को भी न्यूनतम करते हैं।
📚(Research: Andrea J. Glenn et al., “Dietary plant-to-animal protein ratio and risk of cardiovascular disease in 3 prospective cohorts”, The American Journal of Clinical Nutrition, 2024; 120(6):)
🥜 ❗दालें और मेवे क्यों महत्वपूर्ण हैं?❗-
Plant protein का लाभ केवल protein की मात्रा में नहीं है। दालों, फलियों और मेवों के साथ हमें fiber, minerals, antioxidants तथा कई प्रकार के beneficial fats भी मिलते हैं।
Harvard के उपरोक्त अध्ययन में भी researchers ने पाया कि red और processed meat को विशेष रूप से nuts और legumes जैसे plant protein sources से बदलना हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।
📚 (Research: Harvard T.H. Chan School of Public Health — “Higher ratio of plant protein to animal protein may improve heart health”, 2 December 2024; published in The American Journal of Clinical Nutrition.)
❗Processed Meat और कैंसर का खतरा❗-
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर रिसर्च एजेंसी- IARC (International Agency for Research on Cancer ) ने 800 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा के बाद processed meat को Group 1—“carcinogenic to humans” की श्रेणी में रखा है। IARC के अनुसार प्रतिदिन 50 ग्राम processed meat खाने से colorectal cancer का जोखिम लगभग 18% बढ़ने से जुड़ा पाया गया है। IARC ने red meat को Group 2A—“probably carcinogenic to humans” की श्रेणी में रखा है। वैज्ञानिक अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि रेड और प्रोसेस्ड मीट को पकाने के दौरान उत्पन्न होने वाले रसायन (जैसे Heterocyclic Amines और Polycyclic Aromatic Hydrocarbons) DNA को नुकसान पहुँचाकर कैंसर का कारण बनते हैं, जबकि शाकाहारी भोजन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स DNA की रक्षा करते हैं।
📚 (Research: International Agency for Research on Cancer (IARC), WHO — IARC Monographs Volume 114: “Red Meat and Processed Meat”, 2015.)
🥚 ❗अंडे और स्वास्थ्य❗-
अंडे के संबंध में वैज्ञानिक शोधों में अलग-अलग निष्कर्ष मिलते रहे हैं।
प्रसिद्ध चिकित्सक, डॉ. कैल्डवेल एसेलस्टाइन (Dr. Caldwell B. Esselstyn) के शोध में पाया गया कि अंडे और डेयरी का त्याग कर पूर्ण शाकाहारी आहार अपनाने से हृदय-धमनियों की रुकावट (Blockage) को उलटने (Reverse करने) में भी सहायता मिल सकती है।
2019 में प्रकाशित एक बड़ी observational study में लगभग 29,615 वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें अधिक dietary cholesterol का सेवन cardiovascular disease और mortality के अधिक जोखिम से जुड़ा पाया गया। अध्ययन में प्रतिदिन एक अतिरिक्त आधा अंडा (लगभग 300 mg dietary cholesterol के साथ) cardiovascular disease के लगभग 6% अधिक जोखिम और all-cause mortality के लगभग 8% अधिक जोखिम से जुड़ा पाया गया।
(Research: Victor W. Zhong et al., “Associations of Dietary Cholesterol or Egg Consumption With Incident Cardiovascular Disease and Mortality”, JAMA, 2019; 321(11).)
👉 इसलिए वैज्ञानिक दृष्टि से अधिक उचित संदेश है—अंडे और dietary cholesterol का सेवन सीमित रखना तथा पौध-आधारित protein sources को प्राथमिकता देना।
❗Red Meat और Type-2 Diabetes❗-
एक शोध स्टडी में red meat—विशेषकर processed red meat—का अधिक सेवन type-2 diabetes के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है। इसके विपरीत, red meat को nuts और legumes जैसे plant protein sources से बदलना diabetes risk में कमी से जुड़ा पाया गया है।
📚 (Research: Pan et al. — “Red Meat Consumption and Risk of Type 2 Diabetes: 3 Cohorts of US Adults and an Updated Meta-analysis”, American Journal of Clinical Nutrition.)
🦠 ❗एक अदृश्य वैश्विक खतरा—Antibiotic Resistance❗-
आज मानव स्वास्थ्य के सामने सबसे गंभीर वैश्विक चुनौतियों में से एक है Antimicrobial Resistance (AMR)।
पशुपालन में antibiotics के अत्यधिक और अनावश्यक उपयोग से resistant bacteria विकसित हो रहे हैं। ये bacteria भोजन, पशुओं के प्रत्यक्ष संपर्क और पर्यावरण के माध्यम से मनुष्यों तक पहुँच सकते हैं। WHO ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि food-producing animals में antibiotics के उपयोग से antibiotic-resistant bacteria का चयन और उनका भोजन के माध्यम से मनुष्यों तक पहुँचना एक महत्वपूर्ण public-health concern है।
इसलिए पशुपालन में medically important antibiotics के अनावश्यक उपयोग को कम करना मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
📚 (Research: World Health Organization (WHO) — “WHO Guidelines on Use of Medically Important Antimicrobials in Food-Producing Animals”, 2017.)
शाकाहार और पर्यावरण-
Oxford University के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में Nature Food में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में 55,504 लोगों के dietary patterns तथा 38,000 से अधिक farms से जुड़े life-cycle assessment data का विश्लेषण किया गया।
High-meat diet अर्थात प्रतिदिन 100 ग्राम से अधिक मांस खाने वालों की तुलना में vegan diet का environmental impact—
Greenhouse gas emissions लगभग 75% कम
Land use लगभग 75% कम
Water use लगभग 54% कम
Eutrophication लगभग 73% कम
Biodiversity impact लगभग 66% कम पाया गया।
संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर शाकाहार की ओर बदलाव जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को तुरंत कम करने का सबसे तेज़ और प्रभावी व्यक्तिगत उपाय है।
(Research: Peter Scarborough et al., “Vegans, vegetarians, fish-eaters and meat-eaters in the UK show discrepant environmental impacts”, Nature Food, 2023; 4:565–574.).
❗पानी और प्राकृतिक संसाधनों की बचत❗-
मांस और विशेष रूप से beef production का water footprint सामान्यतः plant foods की तुलना में बहुत अधिक होता है। वैज्ञानिक शोधों का व्यापक निष्कर्ष यही है कि animal-based food consumption बढ़ने के साथ environmental impact भी बढ़ता है।
( Research: Scarborough et al., Nature Food, 2023 — dietary environmental impacts across vegan, vegetarian, fish-eating and meat-eating groups.)
एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य
यह भी समझना आवश्यक है कि हर “plant-based” भोजन अपने-आप में स्वास्थ्यकारी नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति मांस छोड़कर अत्यधिक चीनी, मैदा, तले हुए खाद्य पदार्थ और ultra-processed foods खाने लगे तो केवल “शाकाहारी” होने से स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित नहीं हो जाता। सर्वोत्तम विकल्प है—
साबुत अनाज
दालें और फलियाँ
मेवे और बीज
हरी एवं अन्य सब्जियाँ
फल
विविध और कम-प्रसंस्कृत पौध-आधारित खाद्य पदार्थ
अर्थात् Whole-food, plant-rich diet।
जो लोग पूर्ण vegan diet अपनाते हैं, उन्हें vitamin B12 जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की पर्याप्त पूर्ति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
🐄 भोजन से आगे—जीव-दया का प्रश्न
शाकाहार का महत्व केवल cholesterol, diabetes, heart disease या cancer के जोखिम तक सीमित नहीं है। आधुनिक जीव-विज्ञान और तंत्रिका-विज्ञान (Neuroscience) भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि पशुओं में भी मनुष्यों की तरह ही दर्द, भय, खुशी और संवेदनाओं को महसूस करने की क्षमता होती है। जब हम मांस और अन्य पशु-आधारित खाद्य पदार्थों की मांग कम करते हैं, तो पशुओं के औद्योगिक पालन, परिवहन और वध की मांग भी कम होती है।अर्थात्—
कम पशु-पीड़ा
कम औद्योगिक पशुपालन
प्राकृतिक संसाधनों पर कम दबाव
पर्यावरण पर कम भार
और जीव-जगत के प्रति अधिक करुणा।
विज्ञान हमें स्वास्थ्य और पर्यावरण के परिणाम दिखाता है; अध्यात्म-दर्शन हमें उसमें करुणा और अहिंसा का आयाम जोड़ना सिखाता है।
उपरोक्त शोधों का निष्कर्ष है कि शाकाहार केवल भोजन की पसंद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीव-दया से जुड़ी एक जिम्मेदार जीवनशैली है। और एक बात, जिन कारणों से हम भोजन में अनावश्यक पशु-हिंसा को कम करना चाहते हैं, उन्हीं कारणों से वस्त्र, जूते, चमड़े की वस्तुएँ, सौंदर्य प्रसाधन तथा अन्य उपभोग की वस्तुओं का चयन करते समय भी जागरूक होना चाहिए।अतः स्वास्थ्य और करुणा—दोनों के लिए:
“संडे का दिन हो या मंडे,
कभी न खाएँ मांस-अंडे।
न पहनें पशुओं का चमड़ा,
—चाहे कुछ भी हों फंडे।”
जितनी अनावश्यक पशु-हिंसा कम होगी, उतना ही हम करुणा, पर्यावरणीय संतुलन और सह- अस्तित्व की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
अतः संकल्प लें—
शाकाहारी रहेंगे।
शाकाहारी बनेंगे।
शाकाहार का संदेश फैलाएँगे।
जीव-दया और करुणा को जीवन का हिस्सा बनाएँगे
— नीलमकांत जीवमित्र
(मिशन जीवनमित्र)
9910378087

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