श्री देशना
───── ✦ ─────

श्री देशना संग्रह

कुंडलिया

आलेख19/1/20261 मिनट पढ़ने का समय

   

मन-वाणी से मौन रह , मिटते सभी विकार ।

एकचित्त हो ध्यान धर , तार जुड़े करतार ।।

तार जुड़े करतार , कलह-धक्के से बचते ।

मिलती खुशी अपार , जीत की राह पहुँचते ।।

कहे 'रुचिर' कविराय , गुप्त बढ़ती शक्ति मनन ।

होता आत्मविकास , मौन रहिए वाणी-मन ।।

 नवनीत राय 'रुचिर' ,

          सोजत शहर (राजस्थान)

टिप्पणियाँ