श्री देशना संग्रह
मेरा गणतन्त्र
26 जनवरी 2026
इतना सुन्दर देश हमार भारत आज स्वतंत्र,
हम सबके परिवेश से बनता है मेरा गणतंत्र।
सबसे विस्तृत सबसे सुदृढ़ इसका संविधान,
जिसकी दम पर ही पलते हैं अपने अरमान।
हम भारत के लोगों ने ही किया था अंगीकार,
समाजवादी पंंथ निरपेक्ष व लोकतंत्र आधार।
सामाजिक राजनीतिक आर्थिक न्याय मिलें,
विचार धर्म और अभिव्यक्ति में आज़ाद रहें।
पूजा-पाठ की खुली छूट यह ही हमको देता,
प्रतिष्ठा व मौके की समता संविधान ही देता।
हर बंदे की गरिमा देखो पूरी तरह सुरक्षित है,
देश एकता व अखंडता इसमें ही संरक्षित है।
संविधान का पालन करते बन्धु भाव बढ़ाएँ,
अधिकारों के साथ ही कर्तव्य हमें समझाएँ।
भारत माँ हमको क्या देगी ऐसा बाद में बोलें,
हम इसको क्या दे पायें, पहले तो इसे टटोलें।
संविधान वरदान नहीं मनमर्ज़ी को बोने का,
आज़ादी के नाम पर मनमानी से रहने का।
देश से कुछ पाना है तो, कुछ उसको दे तो दें,
प्राण नहीं दे पाएँ तो मन बुद्धि अर्पण कर दें।
-अरुण कुमार पाठक
