श्री देशना
───── ✦ ─────
← सभी लेख

श्री देशना संग्रह

आवश्यक नहीं

5 फ़रवरी 2026

───── ✦ ─────

 आवश्यक नहीं, सत्य ही हो,हर किसी का, 

हो सकता है अविश्वास भी किसी का,


जानबूझ कर गलत/ नशीली दवा दे

 उसी से आस-भाग्य का धागा बंधा रखा है

जिसने कभी विश्वास ही न् किया, 

उसी से सप्तपदी से देह जुड़ा रखा है।

जानता है झूठ से चिढ़ है, 

सच न् कहने को स्वयं को वचनवद्ध कर रखा है।

चरित्रहीन से ही मन-बुद्धि का प्रत्येक 

तार क्यों जुड़ा रखा है।

जाने कौन-सा प्रारब्ध है जिसने 

झूठे चालबाजों से बंधा रखा है।

पचपन वसंत देखा हरियाली न् दिखी, 

एक निर्जीव से प्रत्येक कर्म बंधा रखा है।

केवल तन से जोड़ा, मन-बुद्धि से हमेशा

 अलग ही रखा है।

पाँच अंक का वेतन, 

पत्नी बच्चों पर करे हाथ तंग,

केवल देह से पति-पिता, दिल 

दिमाग से केवल भाई-बेटा ही बना जी रहा है।


निधि मद्धेशिया

कानपुर

टिप्पणियाँ