श्री देशना संग्रह
वह तरक्की किस काम की जो बुढ़ापे मे बाप का सहारा ना बन सके
4 जनवरी 2026
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कलयुग की पैदाहिश है
पैसा ही जिन्दगी की इकलौती ख्वाहिश है
केरियर की दिन रात चिन्ता मे नयी पीढ़ी घुलती है
विदेश जाने की ही इच्छा सर्वत्र मन मस्तिष्क मे मचलती है
माँ बाप औलाद के भविष्य मे अपना जीवन संवारते है
सारी जीवन भर की कमाई उसके भविष्य पर वारते है
भौतिकता की चाह मे अन्धी औलाद भावनाओं से दूर हो रही है
बुढ़ापे का सहारा समझने वाले माँ बाप को ही औलाद बेसहारा कर रही है
बंगला मोटर कार की चाह मे ही औलाद आज भाग रही है
रोटी की बजाय पिज़्ज़ा बर्गर सेंडविच की जीवन शैली अपना रही है
आधुनिकता के इस दौर मे रिश्ते भी आधुनिक हो गये
प्रेम विश्वास से परे स्टेटस सिम्बोल ही आदमी की पहचान बन गये
सच है वह तरक्की किस काम कि जो बुढ़ापे मे बाप का सहारा ना बन सके
कन्धे पर बचपन घुमानेवाले बाप का एक मजबूत कांधा ना बन सके
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र
