श्री देशना संग्रह
जंगल पहाड़ के बच्चे है हम
5 फ़रवरी 2026
लेखक: Neelam Jain
जंगल पहाड़ के बच्चे है हम
रास्ता कौन दिखाएगा
हंसता खेलता जिंदगी था
क्यों बिगाड़ दे गया।।
पहाड़ चढ़ते पानी में खेलते
शिकार करके बांट के खाते
रास्ता हम कभी ना भूले
रिश्ता हम कभी ना तोड़े।।
शिकार ना जाने हो पाया
घर का चिंता मा को सताती
भीख मांगती भूखे रहती
रखके अपना झोलीमे बच्चा ।।
ना पिकाते ज्यादा रखते
एक जगह ना होंगे जमके
आज का रोटी कपड़ा जिंदगी
कल है देवी माता को सलाम।।
क्यों सरकार ने कायदा बनाया
अपना जंगल घर से निकाले
गांव शहर पे मोड दिए हमे
जंगल घट ते ज्यादा दुखी है।।
पढ़ना लिखना आता नहीं हमे
पेट भरने क्या काम करे
भाषा ना तो समज में आते
कहा लाके हमे फसादिए भाई।।
मा बच्चे को कैसे पालें
बीवी भीख मांगने लगी है
आगे रास्ता ना दिखता है
कोई दिखादे आंधे बने है।।
हंसता खेलता जिंदगी था
क्यों बिगाड़ दे गया।।
डा। कुमुदा सुशील
शिवमोगा कर्नाटक🙏🏻
