श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

समझ से परे

आलेख5/2/20261 मिनट पढ़ने का समय

कौन हूँ मैं,

आप जैसा ही हूँ,
अकल,
अनीह,
अनाम,
अरूपा,
अनूपा,
अबोध,
अज्ञानी, 
अप्रत्यक्ष,
अश्वेत,
अमानुष,
अनपढ़,
अलोक,
असत्य,
अवैध,
अशुभ,
अशुद्ध,
असभ्य,
असफल,
असंभव,
अघोषित,
अमान्य,
अन्यायी,
अविश्वासी,
असहाय,
असमान,
अस्वस्थ,
असावधानी,
अहिंसक,
अशिष्ट,
अयोग्य,
अक्षम्य,
अप्रिय,

इन सब
उपलब्धियों के
बावजूद भी
लोग मुझे 
अखण्ड, अनंत, अविनाशी कहते है।
यह समझ के परे है…

प्रेषक:-
जगदीश कुमार धुर्वे
इटारसी, मध्य प्रदेश 

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