श्री देशना संग्रह
मैं ठीक हूँ
5 जनवरी 2026
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आजकल कुछ
आदमी बीमार
पर
मैं ठीक हूँ।
जिंदगी
कुछ धूप है
कुछ छाँह है
आदमी
के पैर दो
दो बाँह है
ढह रही है
उम्र की दीवार
पर
मैं ठीक हूँ।
पास के
भूखण्ड
कूड़ेदान हैं
जो गढ़े
पत्थर हुए
भगवान हैं
ढँक रहा है
ईंट का ईनार
पर
मैं ठीक हूँ।
यह समय
धोखाधड़ी की
पूँछ है
मान है
कुछ भी नहीं
बस मूँछ है
झुक रही है
ध्रुव कुतुबमीनार
पर
मैं ठीक हूँ।
शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'
वाराणसी
