श्री देशना संग्रह
भाषा की पाठशाला' में आज के शब्द : समूह, वर्ग, कोटि और श्रेणी :-
5 जनवरी 2026
कमलेश कमल
समूह : यह किसी भी संग्रह, समुच्चय, टोली आदि के लिए प्रयोग किया जाने वाला सबसे सामान्य संज्ञा है, जैसे– पशु-पक्षियों का समूह। एक साथ मिलाने, इकट्ठा करने अथवा बटोरने के लिए संज्ञा शब्द ‘समूहन’ है। जानना चाहिए कि झाड़ू को ‘समूहनी’ भी कहा जाता है; क्योंकि यह सब कूड़ा-कचरा एक जगह इकट्ठा करती है।
वर्ग :– यह समान वस्तुओं के समूह (सम् + ऊह् + घञ् = समूह), संग्रह, पक्ष, दल इत्यादि को व्यंजित करता है। किसी ‘वर्ग’ [वृज् + घञ् = वर्ग] में पढ़ रहे बच्चों की मानसिक क्षमता लगभग एक-सी होती है; क्योंकि उनका वर्गीकरण उसी आधार पर किया जाता है। वर्ग से विशेषण बनता है ‘वर्गीय’, जिसका अर्थ है– ‘वर्ग का’ अथवा ‘वर्ग संबंधी’।
कोटि : किसी विशेष प्रकार के समूह को ‘कोटि’ कहा जाता है। एक कोटि दूसरी कोटि से भिन्न होती है। ऐसे, प्रचलित अर्थ में, कोटि’ दूसरों से भिन्न प्रकार के एक समूह का सूचक है, पर इसके निम्नलिखित अर्थ हैं:– 1.विभाग, श्रेणी आदि, 2.धनुष का मुड़ा हुआ सिरा, 3.एक करोड़ की संख्या, कोटिशः का अर्थ है– करोड़ों या असंख्य, 4.शस्त्र की धार या नोक(नोंक अशुद्ध है।), 5.उच्चतम बिंदु, आधिक्य, पराकाष्ठा, 6.चन्द्रमा की कलाएँ, 7.अत्यंत कुपित, क्रुद्ध आदि।
ध्यातव्य है कि कोटि से ही बने ‘कोटिक’ का अर्थ है– ‘किसी वस्तु का उच्चतम शिरा’। कोटीर का अर्थ है– मुकुट, ताज़, शिखा, जटा (सन्न्यासियों द्वारा मस्तक पर बाँधी गई बालों की चोटी जो सींग जैसी दिखाई देती है।) इत्यादि।
वस्तुतः, इन सभी शब्दों के मूल में ‘कुट्’ है, जिसमें वक्र होने, छिपने, गूढ़ होने, छल करने आदि का भाव है। कुटिल आदमी टेढ़ा भी होता है और गूढ़ भी। ‘कूटलिपि’ हो या ‘कूटनीति’ सबमें यह भाव है। कुट में ‘घञ्’ प्रत्यय जुड़ने से कोट बना है; जिसका अर्थ किला, छप्पर आदि है। किला, छप्पर, कुटिया(कुटीर) इत्यादिक में भी छुपाव देने का भाव दिखाई देता है। ‘कोट्ट’ का अर्थ भी दुर्ग अथवा किला है; इसलिए दुर्ग की देवी ‘दुर्गा’ का एक नाम ‘कोट्टवी’ भी है।
श्रेणी : यह रेखा, पंक्ति, शृंखला, दल इत्यादिक का सूचक शब्द है। श्रेणी का एक अर्थ सीढ़ी भी है। तंबू या खेमा को ‘श्रेणिका’ भी कहा जाता है। ‘आप किस खेमे में हैं’ का अर्थ है– आप की श्रेणी क्या है या दल क्या क्या है या आप किस समूह से हैं? उर्दू का शब्द ‘दरजा’ ‘श्रेणी’ का पर्याय है। प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी कहने से ही पता चल जाता है कि प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण बच्चे द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण बच्चों से बेहतर होंगे। रेलवे के प्रथम श्रेणी डिब्बों की सुविधा दूसरी और तृतीत श्रेणी के डिब्बों से बेहतर होगी।
