श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

यादों के बादल

8 जनवरी 2026

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कभी खुशी कभी ग़म , 

दे गए यादों के बादल।

कभी हँसी,

कभी रुलाकर गए, 

यादों के बादल।।


पहली नजर में ,

           नजर हटी नहीं।

वो रात  काटने से,

                कटी नहीं। ।

 वो  याद दिला गए,

यादों के बादल........   


मुलाकातों का दौर ,

      मौन से शुरू हुआ ।   

धीरे धीरे  फासला,

                कम हुआ।।

वो दिन लेकर आ गए,

यादों के बादल..... ...


घूमना फिरना मौज    

            मस्ती के पल।।

आज भी जीवंत हो गए,

      वो गुजरे हुए कल।।

हमको उनसे मिला गए,

यादों के बादल........


उम्र के साथ साथ,

         बाल हुए सफेद।

दिलों में होने लगे ,

     उनके मेरे मतभेद।।

सुनाकर प्रेम की पाती,

हमें जवां बना गए,

यादों के बादल..

शुक्रिया तुम्हे यादों के बादल

  कवि अशोक गौतम भोपाल

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