श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

ग़ज़ल

27 जनवरी 2026

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हर किसी महफ़िल में वो बदनाम है।

बोलने का सच यही अंजाम है।।


हर सुबह की होगी निश्चित शाम है।

ज़िन्दगी का बस यही पैगाम है।।


आज फिर वो मिल रहा मुझसे गले,

खास लगता है कि कोई काम है।


है नहीं अनमोल कुछ भी विश्व में,

हर किसी शै का यहाॅं पर दाम है।


बाग़ के हालात बदतर देखकर,

दिल में बेहद मच गया कोहराम है।


सावधानी से बहुत मिलना सदा,

स्याह दिल उसका है मुॅंह में राम है।


कर दिया जाता है अनदेखा मुझे,

सादगी का बस यही ईनाम है।


बैठ मत तू इस क़दर मायूस हो,

देख मंज़िल सामने दो गाम है।


ख़ून से सींचा है मैं ने बाग़ को,

मेरे सर ही ख़ून का इल्ज़ाम है।


छोड़कर के वो मुझे जब से गये,

ऐ विजय तब से बहुत आराम है।

                  विजय तिवारी, अहमदाबाद

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