श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है

संदीप सक्सेना

कविता27/8/20261 मिनट पढ़ने का समय

ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है

क्या है जो बताना चाह रही है

तेरे आगोश मे ही मेरा वजूद है

फिर क्यों मुझसे मेरा ही अक्स मिटा रही है

ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है

हर ज़ज़्बात तेरे सुलझनों से परे है

उधेड़बुन की असीमित गलियों से घिरे है

समझ से ऊपर ए जिंदगी समझ के ही सहारे है

धुंधला सा ये जहान और बिखरे बिखरे से इशारे है

अंजान सी ए जिंदगी तू चली जा रही है

ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है

मंजिल ए जिंदगी बता तेरी क्या है

चलना है चलने की वजह क्या है

दूर तलक नज़रों से ओझल तेरी सदाई है

वक्त के सितम ईबारत क्या बना रही है

ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है

जिंदगी मिली तू खूब मिली हैरान मिली

वक्त के कहर से नासमझ परेशान मिली

मकसद ए जिंदगी तेरा इम्तिहान हो गया

तुझे जीना कसम ईमान हो गया

पल दर पल ही तू जहन मे समा रही है

ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है

संदीप सक्सेना

जबलपुर म प्र

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