श्री देशना संग्रह
साज सवँर के बदरा आए
-डॉ अर्जुन गुप्ता 'गुंजन'
साज सवँर के बदरा आए
साज सवँर के बदरा आए,
पाहुन बन कर आज।
आगे-आगे हवा मचलती,
करे खूब आवाज॥
बंद खिड़कियाँ दर दरवाजे,
खुले आज हरओर।
पाहुन के दर्शन को तरसे,
गली गाँव हरछोेर॥
धूल भागती लहँगा खोंसे,
पवन बुहारे राह।
बाट जोहता आस लगाए,
पावन सावन माह॥
फुदक-फुदक कर दादुर नाचे,
झींगुर ठोके ताल।
मस्त मगन मन मधुवन मोहे,
बदल गई है चाल॥
बूढ़ा बरगद शीश झुकाकर,
बना आज अगवान।
स्वागत में भर भरकर लाया,
पकुहा फल पकवान॥
बाँह पसारे तरुवर सारे,
गाते स्वागत गान।
धानी चूनर धारण कर अब,
धरणी हुई सयान॥
मैना मधुरिम स्वर में बोले,
भ्रमर डोलता बाग।
पंचम सुर में कोयल गाए,
छेड़े नित अनुराग॥
नद-नाले संतृप्त स्वरों में,
खड़े द्वार पर आर्य।
बूँदों की बारात चली है,
अनुपम है सौदार्य॥
वन उपवन में कजरी गातीं,
नव लतिकाएँ झूम।
बूँदों को अंकों में भरकर,
पल्लव लेता चूम॥
हर्षित हो हँस-हँस कर हलधर,
गाएँ राग मल्हार।
विरहिन व्याकुल होकर बोले,
नित बरसो सरकार॥
पारिजात पुष्पित पंखुड़ियाँ,
खींच रहीं तस्वीर ।।
नवल पुष्प पावन पंकज का,
परिमल हुआ अधीर।
बूँदों की बौछार पड़ी तो,
महक उठा घर-बार।
सरवर में सरसिज शोभित हो,
बना गले का हार।।
-डॉ अर्जुन गुप्ता 'गुंजन'
एच-1, विनायक सुख विला, लूकरगंज,
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 211001

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