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लाला लाजपतराय जैन थे

29 जनवरी 2026

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लाला लाजपत राय को सामान्य जन‌ आर्य समाजी के रुप में जानता है।पर वे जन्मत: जैन थे।

लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी, 1865 को पंजाब के मोगा जिले में हुआ था। लाला लाजपत राय के दादा एक श्वेतांबर जैन थे। वे मालेर (पंजाब) के पटवारी थे। लालाजी के पिता मुंशी राधा कृष्ण आजाद गवर्मेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, रेवाड़ी (तत्कालीन पंजाब) में उर्दू के अध्यापक थे। लालाजी की मां गुलाब देवी एक सिख परिवार से थीं। अतः जैन‌ धर्म उनके परिवार से गायब हो गया था। मुंशी जी के उर्दू अध्यापक होने के कारण उनका झुकाव भी इस्लाम धर्म की तरफ हो गया था और वे मुसलमानों की तरह रोजे/नमाज का पालन तो करते थे पर परिवार परंपरा के विरुध्द जाकर इस्लाम को खुलकर स्वीकार नहीं कर सके थे। 


लाला लाजपत राय को हिंदू धर्म ने बहुत प्रभावित किया था। उनका मानना था कि प्रत्येक भारतीय को हिंदू जीवनशैली को अपनाना चाहिए क्योंकि इन आदर्शों पर चलकर ही समाज में शांति व्यवस्था स्थापित की जा सकती है। सो लाहौर में कानून की पढ़ाई करते हुए लाला लाजपत राय हिंदू धर्म का अनुशरण करते रहे। उन्होंने क़ानून की शिक्षा प्राप्त कर हिसार में वकालत प्रारम्भ की। कालान्तर में स्वामी दयानंद के सम्पर्क में आने के कारण लाला जी आर्य समाज के प्रबल समर्थक बन गये। यहीं से इनमें उग्र राष्ट्रीयता की भावना जागृत हुई। लाला जी को पंजाब में वही स्थान प्राप्त था, जो महाराष्ट्र में लोकमान्य तिलक को। लालाजी को 'पंजाब के शेर' की उपाधि भी मिली थी।


भारतीयों को अंग्रेजी संस्थानों से हटकर उत्तम और गुणात्मक शिक्षा देने के उद्देश्य से लाला लाजपत राय ने ब्रैडलॉफ हॉल, लाहौर के भीतर नेशनल कॉलेज की स्थापना भी की थी। भगत सिंह इसी कॉलेज के स्नातकों में से एक थे। 


लाला लाजपत राय वर्ष 1907 में अमरीका गए और वहां हुए विभिन्न अनुभवों को यात्रा वृतांत के रूप में 

अपनी पुस्तक द यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमरीका (1916) में संकलित किया।


अमरीका से वापिस आने पर लाला लाजपत राय ने गांधी जी के आंदोलन में जुड़ गये जिसकी वजह से उन्हें वर्ष 1921-1923 जेल में भी बिताना पड़े। वे राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल- बाल- पाल में से एक थे तथा वर्ष 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में वे कांग्रेस के अध्यक्ष भी चुने गये थे। 


लालाजी ने भारतीयों की आर्थिक समृद्धि के लिये पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना भी की थी और अंग्रेज़ व्यापारियों को अच्छी टक्कर दी थी। 


30 अक्टूबर,1928 को लाला लाजपत राय और मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में साइमन कमीशन के विरोध में आंदोलन चलाया गया था जिसमें कि अंग्रेजी पुलिस द्वारा किया लाठीचार्ज 

लालाजी को प्राणघातक सिद्ध हुआ और 17 नवंबर, 1928 को इन महान देशभक्त ने अंतिम सांस ली। 


सरदार भगत सिंह, जो कि इस पूरी घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे, ने लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिये ब्रिटिश अंग्रेज पुलिस अधिकारी पर बम फेंका था। 


ऐसे महान देशभक्त, जैन वंश के अंश, लालाजी की स्मृति को नमन!!

नीलमकांत*जीवमित्र

9910378087

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