श्री देशना संग्रह
वीर शासन जयंती: धर्मतीर्थ की दिव्य स्थापना का पावन दिवस
30 जुलाई 2026
लेखक: Neelam Jain
श्रावण कृष्ण प्रतिपदा जैन धर्म के इतिहास की वह स्वर्णिम तिथि है, जब भगवान महावीर स्वामी की प्रथम दिव्यध्वनि प्रकट हुई और विश्व के कल्याण हेतु जैन धर्म शासन (धर्मतीर्थ) की स्थापना हुई। यही कारण है कि यह दिन "वीर शासन जयंती" अथवा "तीर्थोत्पत्ति दिवस" के रूप में श्रद्धा, भक्ति और गौरव के साथ मनाया जाता है।
भगवान महावीर को वैशाख शुक्ल दशमी के दिन केवलज्ञान प्राप्त हो गया था। सामान्यतः तीर्थंकर को केवलज्ञान के साथ ही दिव्यध्वनि प्रकट हो जाती है, किंतु इस बार एक अद्भुत अपवाद हुआ। प्रथम गणधर की अनुपस्थिति के कारण भगवान 66 दिनों तक मौन रहे। असंख्य मनुष्य, देव और अन्य जीव उनकी अमृतमयी वाणी सुनने के लिए प्रतिदिन समवशरण में उपस्थित होते, परंतु दिव्यध्वनि का प्राकट्य नहीं हुआ। सभी धैर्यपूर्वक उस शुभ क्षण की प्रतीक्षा करते रहे।
उधर मगध के महान विद्वान, प्रकाण्ड तर्कशास्त्री इन्द्रभूति गौतम अपने ज्ञान और विद्वता के कारण प्रसिद्ध थे। देवेन्द्र ने एक ब्रह्मचारी बालक का रूप धारण कर उन्हें एक गूढ़ गाथा का अर्थ पूछकर भगवान महावीर के समवशरण तक पहुँचाया। इन्द्रभूति गौतम शास्त्रार्थ की भावना से वहाँ पहुँचे, किंतु समवशरण में स्थित मानस्तंभ के दर्शन मात्र से उनका ज्ञान-अहंकार गल गया। उन्हें अनुभव हुआ कि अनन्त ज्ञान के सामने उनका समस्त पाण्डित्य अत्यंत सीमित है। विनम्र भाव से उन्होंने भगवान महावीर की शरण ग्रहण की, सम्यग्दर्शन प्राप्त किया और दीक्षा लेकर भगवान के प्रथम गणधर बने।
अगले ही दिन, श्रावण कृष्ण प्रतिपदा के ब्रह्ममुहूर्त में भगवान महावीर की दिव्यध्वनि प्रकट हुई। उसी के साथ धर्म की ज्ञानगंगा प्रवाहित हुई, चतुर्विध संघ—मुनि, आर्यिका, श्रावक और श्राविका—की स्थापना हुई तथा अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मकल्याण पर आधारित जैन शासन का शुभारंभ हुआ।
यही कारण है कि यह दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान और करुणा के युग के प्रारंभ का प्रतीक माना जाता है।
वीर शासन जयंती हमें यह संदेश देती है कि ज्ञान तभी सार्थक है जब उसके साथ विनम्रता जुड़ी हो, और धर्म तभी जीवंत होता है जब वह समस्त प्राणियों के कल्याण का मार्ग बने। भगवान महावीर का शासन आज भी मानवता को अहिंसा, क्षमा, संयम और आत्मजागरण का अमर संदेश देता है। यही इस पावन पर्व का वास्तविक महत्व और इसकी शाश्वत प्रेरणा है।
:::
