श्री देशना संग्रह
हमारी पुकार सुनो!
30 जनवरी 2026
[ हमारी पुकार सुनो!
कितनी सुंदर है ये दुनिया
जुड़े हुये इससे सब प्राणी
अंतिम सांसों तक का जीना
जीना चाहें सारे प्राणी!
मानव! तुम तो इस ब्रह्माण्ड में
ईश्वर की सर्वोत्तम कृति हो
तो फिर क्यों खा जाते हो
अन्य कृतियां हैं जो प्राणी ?
गैया,बकरी,भैंस, मेमने
चिड़िया,भेड़ें और मुर्गियां,
कुत्ते-बिल्ली, सुवर सभी ही
जीवन जीना चाहें प्राणी!
शेर, टाईगर, हाथी, चीतल
घने जंगलों में रहकर ही
जंगल को मंगल करते हैं
ये सारे ही जीवित प्राणी!
सागर की बलखाती लहरें
नीली गहराई बेमतलब हैं,
जल में अगर न हों मछलियां
व्हेल, डाल्फिंस से प्राणी!
भरपूर अन्न-जल दिया
और फल दिये प्रकृति ने
खाने को फिर भी, मानव क्यों
खा जाते हैं बाकी प्राणी?
जैसा खून-मांस तुम्हारे तन में
जैसी पीड़ा-कष्ट तुम्हारे तन में
बिल्कुल वैसा ही अनुभव तो
करते हैं ये सारे प्राणी!
नारी-दूध बच्चों को अमृत
पशुओं का दूध वैसे ही
उनके बच्चों को ही पीने दो
दया मांगते सारे प्राणी!
पशु-पक्षी के गले ना काटो
उनके बच्चों को मत खाओ
वे मांस नहीं हैं जीवन हैं वे
करें याचना सारे प्राणी!
जीने का अधिकार!मानवो,
जैसे ईश्वर ने तुम्हें दिया है
वैसा ही तो दिया इन्हें है
फिर क्यों खाते हो प्राणी.
पिंजड़ों में क्यों हमें ठूंसते?
दड़बों में क्यों हमें जकड़ते?
क्या वजह हमारी हत्या करते?
पूंछ रहा है प्राणी-प्राणी!
शाकाहार-मानव की भाषा।
पर्यावरण बचाने की आशा।
मानवता की है परिभाषा।
याद दिलाएं सारे प्राणी!
पशु-पक्षी के भगवान बनो
कुछ तो दया-निधान बनो।
शाकाहारी- वीगन बन जियो
प्रार्थना करें आज सब प्राणी!
- नीलमकांत जीवमित्र
9910378087
