श्री देशना संग्रह
मानव तुम मानव बन जाओ
29 जनवरी 2026
मानव तुम मानव बन जाओ,
अब यह दानवता छोड़ दो ।
तुम ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति
मन की कलुषता छोड़ दो ।
पाप हृदय में तुम मत पालो ,
स्वार्थी बनना छोड़ दो ।
परोपकार ही श्रेष्ठ धर्म है ,
निज हित जीना छोड़ दो ।
केवल धन वैभव की लालसा
अपनी ही सुख-सुविधा का ध्यान ।
यही तो मानव धर्म नहीं है ,
ऐसा करना छोड़ दो ।
तुम उस भारत के वासी हो ,
जहाँ के कण -कण में बसे हैं राम।
और यहीं की पवित्र धरा पर ,
गीता का ज्ञान दिये थे श्याम।
राम -कृष्ण के आदर्शों से ,
क्यों तू मुख रहा है मोड़ ।
भज ले हरि का नाम तू ,
मोह के बंधन अब तोड़ ।
मानवता को तज कर जब तू
माल खजाना जोड़ेगा ।
अंत समय में कुछ ना जायेगा
सब यहीं पर छोड़ेगा ।
हर मानव यह जानता है,
फिर भी कितना है मूरख
हृदय किसी को नहीं भाता ,
देखता है सिर्फ सूरत ।
दान -धर्म सब त्याग चुका है,
अब बस केवल दिखावा है ।
जीवन भर किया पाप -कर्म ,
अन्त समय पछतावा है ।
पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर
उत्तर प्रदेश
