श्री देशना संग्रह
धर्म का क्या अर्थ होता है?
6 फ़रवरी 2026
धर्म का क्या अर्थ होता है?
धर्म का अर्थ होता है - जो आत्मा में धारण किया जाए, उसका नाम धर्म है। आत्मा जिन गुणों को धारण करताहै, उस गुण को धर्म कहते हैं। सम्यग्दर्शन भी आत्मा का गुण है और यह चारित्र भी आत्मा का गुण है। इस गुण को जो जैसा है, उसको बिल्कुल आत्मा के स्वभावभूत धारण कर लेना या उसको प्राप्त कर लेने का नाम धर्म हो जाता है।
लोग कुछ देने को या कुछ करने को धर्म समझ लेते है। दान इत्यादि करना, औपचारिक रूप से धर्म हो सकता है। लेकिन वास्तव में जो आत्मा में धारण किया जाए, उसका नाम धर्म है। जो शरीर से किया जाए, उसका नाम धर्म हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। लेकिन वास्तविक धर्म वही है, जो आत्मा में धारण किया जाए। यह जो आत्म स्वरूप धर्म होता है, यह सम्यग्दर्शन भी आत्मा का स्वभावभूत धर्म है और सम्यग्चारित्र भी आत्मा का स्वभावभूत परिणाम है। इसलिए चारित्र भी आत्मा का धर्म है और सम्यग्दर्शन भी आत्मा का धर्म है। एक मूल रूप में है और एक चूल रूप में है।
