श्री देशना संग्रह
हे माँ सरस्वती, हम पर शब्द-सुधा बरसा जाओ…
23 जनवरी 2026
हे वीणावादिनी, श्वेत प्रकाश की धार,
मौन हृदय में भर दो भावों का संसार।
सूने पड़े शब्दों को स्वर दे जाओ,
हे माँ सरस्वती, हम पर शब्द-सुधा बरसा जाओ।
अज्ञान के तम से ढँकी मेरी लेखनी,
डर से काँपती रहती है मेरी चेतनी।
साहस का दीपक मन में जला जाओ,
हे माँ सरस्वती, हम पर शब्द-सुधा बरसा जाओ।
जहाँ सत्य थककर बैठ गया चुपचाप,
जहाँ भाव रो पड़े सह न पाए संताप।
वहाँ अपनी वीणा की तान सुना जाओ,
हे माँ सरस्वती, हम पर शब्द-सुधा बरसा जाओ।
मेरे अक्षर अहं न बन जाएँ कभी,
मेरे वाक्य चोट न पहुँचाएँ सभी।
करुणा की सीमाएँ उनमें रचा जाओ,
हे माँ सरस्वती, हम पर शब्द-सुधा बरसा जाओ।
जो लिखूँ वह प्रार्थना बन जाए,
जो कहूँ वह शांति पहुँचाए।
लोकहित का पथ मुझे दिखला जाओ,
हे माँ सरस्वती, हम पर शब्द-सुधा बरसा जाओ।
मेरे हृदय की देहरी पर आ विराजो,
जीवन-भर की साधना को शब्द दो।
मेरी लेखनी को तुम अमर बना जाओ,
हे माँ सरस्वती, हम पर शब्द-सुधा बरसा जाओ।
डॉ. गोपालदास नायक, खंडवा
