श्री देशना संग्रह
सजल
23 जनवरी 2026
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ऋतु बसंत का हुआ आगमन।
ठंडक का हो रहा समापन।।
अमलतास के फूल खिले हैं।
लाल, बैंगनी दिखता उपवन।।
खेतों में फूली है सरसों।
लगे प्रकृति बिखराया कंचन।।
आम्र मंजरी की खुशबू से।
कोयल का हर्षित है तन-मन।।
गेहूं की लटकी है बल्कि
हुए प्रफुल्लित धरती- नंदन।।
आसमान में बादल छाए।
बढ़ा रहे कृषकों की धड़कन।।
फूलों पर भॅंवरे मॅंडराए।
बागों में चिड़ियों की चहकन।।
गूॅंज रहा संगीत प्रकृति में।
वीणा वादिनि का अभिनंदन।।
वासंती परिधान पहनकर।
सरस्वती माता का वंदन।।
प्रोफेसर वी पी सिंह
भौतिकी विभाग
बरेली कॉलेज, बरेली
