श्री देशना संग्रह
संस्मरणों में लेखकगांव 2026
6 जनवरी 2026
लेखक गांव , थानो, देहरादून में 23 दिसंबर से 25 दिसंबर तक अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के 23वें राष्ट्रीय अधिवेशन के भव्य सफल आयोजन के उपलक्ष्य में संस्मरणों में लेखकगांव _ 2026 गोष्ठी का आयोजन Srijani ग्लोबल चैनल (जर्मनी अमेरिका एवं कनाडा) पर किया गया।
कार्यकम के मुख्य अतिथि लेखक गांव के संस्थापक माननीय डा रमेश पोखरियाल निशंक जी (पूर्ण मुख्यमंत्री, उत्तराखंड एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार), कार्यक्रम की अध्यक्षता जर्मनी के मैक्स म्यूलर सम्मान से सम्मानित पत्रकार एवं वैज्ञानिक संचेतना के कवि ABS4 संस्था के ग्लोबल प्रेसिडेंट पंडित सुरेश नीरव जी ने की एवं कार्यक्रम का कुशल संचालन जर्मनी की सुप्रसिद्ध शिक्षाविद, प्रज्ञान विश्वम की संपादक एवं लेखक गॉंव की अंतर्राष्ट्रीय संयोजक डॉ शिप्रा शिल्पी ने किया।
माननीय डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जी ने सभी के संस्मरणों से अभिभूत होते हुए कहा " लेखक गांव , सृजन की यह तपोस्थली हर अकलुषित मन, जो सकारात्मक सृजन करने के लिए छटपटाहट से परिपूर्ण है उसका अपना ठौर है। ये आपका अपना साधना स्थल है, साधना साहित्य की, संस्कृति की एवं विचारों की। सभी के लिए स्वस्ति कामनाओं के साथ उन्होंने लेखक गांव में होने वाली आगामी गतिविधियों की भी चर्चा की और कहा लेखक गांव सदैव आप सब के स्वागत के लिए उत्सुक है।
संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव जी ने कहा सर्वभाषा समिति के उद्देश्यों और लेखक गाँव की अवधारणा में स्वाभाविक सामंजस्य दिखाई देता है। उन्होंने कहा लेखक गांव निशंक जी की कविता है, जिसे आज पूरा विश्व गा रहा है। ये उनकी कृति है, कृतित्व है। निशंक जी की विद्वता ने उन्हें स्वीकार्य और अनिवार्य बनाया है और लेखक गांव को जाग्रत साहित्यिक तीर्थ । यह वो स्थान है जहां सांस लेना भी उत्सव बन जाता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मां वीणा वादिनी को अपने स्वरचित दोहों से नमन करते हुए डॉ शिप्रा ने कहा : माननीय निशंक जी का अपनत्व हम सभी के मन को सम्मोहित करता है ॥साथ ही लेखक गांव की पावन धरा पर कदम रखते ही मन से सारे अहम और वहम का स्वतः ही नाश हो जाता है और रह जाती है सात्विकता। उन्होंने कहा हम सभी को लेखक गांव की सकारात्मक अबाध गतिविधियों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा लेखक गाँव जैसे स्थायी साहित्यिक परिसर में 23वे राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन होने से कार्यक्रम को राष्ट्रीय गरिमा मिली। जिसके लिए आदरनीय नीरव जी को साधुवाद जो छोटे बड़े अवसरों को भव्य उत्सव में परिवर्तित कर देते है।
इस अवसर पर गीतकार ज्ञान चंद मर्मज्ञ ( बेंगलुरु), डॉ प्रकाश उपाध्याय ( जावरा, मध्य प्रदेश), सेठ सोहन लाल खंडेलवाल (ग्वालियर), विनय कुमार ( गुरुग्राम), महोत्सव के संयोजक सुभाष चंद सैनी( देहरादून), सह संयोजक राकेश जुगराण,zzवरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार तथा पूर्व जनसंपर्क अधिकारी मुख्यमंत्री उत्तराखंड, पूर्व जनसंपर्क अधिकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार डॉ बेचैन कंडियाल जी एवं संस्था की संरक्षक सुश्रीमधु मिश्रा ने अपने बहुमूल्य विचार प्रकट कर कार्यक्रम की गरिमा में श्रीवृद्धि की।
ज्ञातव्य हो “भाषाई विविधता में सांस्कृतिक एकता” को सशक्त करने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश की विविध भाषाओं के साहित्यकार, कवि, लेखक और संस्कृतिकर्मी शामिल हुए थे। इस अवसर पर बहुभाषी साहित्यिक समन्वय, भारतीय भाषाओं की एकता और सांस्कृतिक संवाद पर केंद्रित सत्र कविता-पाठ, विचार गोष्ठियाँ, भाषायी प्रस्तुतियाँ एवं संवादात्मक बैठको का भी आयोजन लेखक गांव में किया गया था।
श्रोता के रूप में अमेरिका, यूएई, ब्रिटेन, कुवैत, आस्ट्रेलिया, क़तर, आदि देश विदेश से जुड़े प्रबुद्ध साहित्यकारों की उत्साहजनक संख्या इस बात का प्रमाण है कि कार्यक्रम सफल ही नहीं सार्थक भी रहा। सभी आत्मीयजनों का हार्दिक आभार।
डॉ शिप्रा शिल्पी
