श्री देशना संग्रह
माँ नर्मदा रहस्य
8 जनवरी 2026
धाराजी एक तपोस्थान एक #याद।।।।
ओंकारेश्वर बाध के बनने के पुर्व धाराजी कि पवित्र गुफाएँ जो तपवस्वीओ कि कि तपो स्थली रही।
एसी ही एक गुफा जिसमें एक संत के दर्शन हमने किए जो एक पहाड के मध्य में थी।
जिसमें संत महात्मा एक लकडी कि सिढी को लगाकर नीचे उतरते थे। ओर अपनी दैनिक क्रिया के पश्चात पुनः गुफा में जाकर सिढीया ऊपर खिच लेते थे। जिससे वो दुनिया से सम्पर्क से दुर हो जाते थे।
बांध के बनने के बाद भी उनमे से क्ई गुफिये दिखती थी जो आपस में आंतरिक रूप से मिलती हैं। और प्रकृति का अनुपम रचना रही है।
21 म्ई 2017 में दोस्तों (हेमंत गौरव और राजेंद्र) के साथ विचार हुआ वहा जाने का। हम वहा कार से गये वही पर एक दुकानदार गणेश से मुलाकात हुई जो हमे अपनी एक छोटी नाव से लेकर गया। उन गुफाओ को मित्रो ने पहली बार देखी वो लोग काफी विस्मित हुए और विस्मित हो भी क्यो ना उस जगह कि रौनक ही ऐसी है । कभी तपस्वीओ का गढ रही यह गुफाऐ विरान हो गयी थी क्योकि बांध का बैक वाटर गुफाओ तक पहूच चुका था।
परन्तु आज भी वो बहुत आकर्षिक थी क्योकि जिस स्थान पर अनंत समय से मंत्र उच्चारण होते रहे तप होता रहा। वहा कि आवृति तो भिन्न होगी वहा तपस तरंगो कि आभा आज भी महसूस कि जा सकती है।
अब जब इस वर्ष ओंकारेश्वर बाध का जलस्तर बडाया गया यह सभी गुफाये पुर्ण जल विलीन हो गयी। अब हम इस पवित्र स्थान को शायद ही कभी देख पाये।
धाराजी कि इन पवित्र गुफाओ कि अमिट छवि मानस पटल पर हमेशा के लिए अमर हो गई।
इन गुफाओ के साथ क्ई रहस्यमय स्थान जल विलीन हो गई जिनको समझना भी एक पहली रही। और इन्हें हम संसारीओ को समझना भी आसान नहीं था।
क्योंकि यह तो माँ नर्मदा रहस्य हैं।
माँ नर्मदा रहस्य
https://youtu.be/Lr0UJvKCI5I
प्रमोद अत्रे
