श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

चंचल नैन

19 जनवरी 2026

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 अजब -गजब  भावों का संगम, शब्द गौण हो जाते हैं ।

 मौन अधर के बोल अनकहे ,चंचल नैन सुनाते हैं।।


 संकल्पित कर जीवन सुन्दर, सपनों को साकार करें। 

संकेतों से बातें करते, इनका हम आभार करें।

 घनी अमावस रजनी में भी, चित्र उभर कर आते हैं।

मौन अधर के बोल अनकहे ,चंचल नैन सुनाते हैं।।


देख सामने प्रिय को अपने,लाज इन्हें है आ जाती।

अंतर्मन में उठी उमंगे , व्यथा न अपनी कह पाती।

रोम रोम पुलकित हो जाता, कौतूहल छलकाते हैं।

मौन अधर के बोल अनकहे ,चंचल नैन सुनाते हैं।।


धीरे-धीरे दस्तक देते, बीच सभी के  शर्माते। 

सखियाँ जब भी मुझे छेड़ती,मंद मंद तब मुस्काते। 

विमल प्रेम की अनुपम भाषा, कोमल भाव जगाते हैं।

 मौन अधर के बोल अनकहे, चंचल नैन सुनाते हैं।


लक्ष्य साध जो पग धरते हैं, उस हिम्मत की थाह नही।

 कंटक भी आसान करें पथ,पीड़ा की परवाह नहीं।

चाहे सुख हो या दुख आए , मिलकर साथ निभाते हैं

मौन अधर के बोल अनकहे चंचल नैन सुनाते हैं।।


प्रीत प्यार नफरत भावों को ,प्रतिपल रहते ये समझे। 

 नैनो से जब नैना लड़ते ,एक दूसरे से  उलझे।

चैन नहीं तब इनको मिलता, हृदय कलश छलकाते हैं ।

मौन अधर के बोल अनकहे, चंचल नैन सुनाते हैं।।

 


डॉ गीता पाण्डेय  अपराजिता

 रायबरेली उत्तर प्रदेश

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