श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

ग़ज़ल

20 जनवरी 2026

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छुपा के उसकी वो तस्वीर ले के आया था 

मेरे वो क़त्ल की तदबीर ले के आया था 


किया है क़त्ल भी उसने बड़ी खमोशी से 

नज़र में अपनी वो शमशीर ले के आया था 


मिले जो तुम तो मिला मुझको ये जहां सारा 

बहुत ही ख़ास मैं तक़दीर ले के आया था 


किसी ने पूछ लिया जब पता मुहब्बत का 

लहू में डूबा हुआ तीर ले के आया था 


उसी मकान में अब कोई और रहता है 

समझ रहा था जो जागीर ले के आया था 


धर्मेन्द्र तिजोरीवाले 'आज़ाद'

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