श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

हिंदी बनेगी दुनियां की सिरमौर भाषा

12 जनवरी 2026

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रायपुर, 10 जनवरी। विश्व हिंदी दिवस के परिप्रेक्ष्य में "मैं भारत हूँ फाउंडेशन" के तत्वावधान में स्थानीय वृंदावन हॉल में "राजभाषा हिंदी का बढ़ता वैश्विक स्तर" विषयक एक संगोष्ठी आयोजित की गई। 

कवियत्री उर्मिला उर्मी के मंगलाचरण से प्रारंभ हुई इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कार्यक्रम संयोजक जैन कैलाश रारा ने कहा कि विश्वास रखिए वह दिन अब अधिक दूर नहीं जब हिंदी दुनियां की सिरमौर भाषा बनेगी। मुख्य अतिथि दिव्यांगजन वित्त एवं विकास आयोग के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया ने कहा कि भाषा भावों की अभिव्यक्ति का एक सुंदरतम साधन है। विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य साहित्य परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी का 'काशी तमिल संगम' कार्यक्रम उत्तर से लेकर दक्षिण तक भारत को एक सूत्र में पिरोने का एक प्रमुख संबल बनेगा। मुख्य वक्ता गिरीश पंकज ने कहा कि क्षेत्रियता की भावना भाषा की राष्ट्रीय समृद्धि के भाव को कमजोर बनाती है। हमारे साहित्यकारों को चाहिए कि छत्तीसगढ़ी के अधिक से अधिक शब्दों को हिंदी में समावेशित कर इसकी राष्ट्रीय पहचान बनाने में योगदान देवें। वक्ता डॉक्टर महेंद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि अंग्रेजी कामकाज की भाषा हो सकती है किंतु हमारे संस्कारों की भाषा तो हिंदी ही रहेगी। डॉ. अनिल द्विवेदी ने कहा कि नए-नए शब्द गढ़ते रहिए, ए.आई. कभी आप पर हावी नहीं हो पाएगी। ज्योतिषविद उषा गंगवाल ने कहा कि हिंदी में बोले, हिंदी में गाए एवं हिंदी में ही जिये। कवियत्री पूजा अग्रवाल ने हिंदी को मात्रस्वरूपा भाषा बतलाया। कार्यक्रम में जहां एक ओर कवि राजेश जैन 'राही' ने मानस के नव रसो को अपने छंदों में पिरोया तो वहीं दूसरी ओर साहित्य कार शकुंतला तरार ने 'मैं छत्तीसगढ़ की बेटी हूं' शीर्षक अपनी भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। आयोजन को शिक्षक लखनलाल बानी एवं मीता अग्रवाल ने भी संबोधित किया। 

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रकाश सुराणा, शीला प्रजापति, शोभा पंडित, अशोक वैश्य, ऋषि गुप्ता, अनुराग जैन, संजय जैन, महेंद्र सेठी एवं दीपक जैन की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। 

कार्यक्रम का सफल संचालन ममता जैन के द्वारा किया गया। 

-कैलाश रारा 

कार्यक्रम संयोजक

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