श्री देशना
───── ✦ ─────

श्री देशना संग्रह

गुरु की महिमा

प्रगति दत्त

कविता23/8/20261 मिनट पढ़ने का समय

गुरु की महिमा

गुरु वही, जो देता ज्ञान ।

सदा मिटाता है अज्ञान ।

पहली गुरु तो होती मां ।

पहली शिक्षा देती मां ।

दूजे गुरु तो होते तात ।

देते दिशा निभाते साथ ।

तीजे गुरु होते हैं शिक्षक ।

वही सिखाते हमको अक्षर ।

ये होते ज्ञान का भंडार ।

मिटाते अज्ञान का अंधकार ।

पर असली गुरु होता वक्त ।

ये गुरु होता बड़ा सख़्त ।

वक्त का यदि ना माना कहना ।

पड़ जायेगा फ़िर दुःख सहना ।

करोगे यदि इसका उपयोग ।

होगा जीवन में सुख भोग ।

और एक गुरु है अपना जीवन ।

सुख और दुःख से देता शिक्षण ।

हर शिक्षा इससे ही शुरु है ।

हां ये जीवन सबसे बड़ा गुरु है ।

प्रगति दत्त

अलीगढ़ उत्तर प्रदेश 🙏 🙏

टिप्पणियाँ