श्री देशना संग्रह
ग़ज़ल का स्वर : वरिष्ठ नागरिक के तर्ज पर
प्रो. (डॉ.) अर्जुन चव्हाण
ग़ज़ल का स्वर : वरिष्ठ नागरिक के तर्ज पर
तन जैसे भी हो,मगर मन से बच्चे-से रहना,
लोग जैसे भी रहते हो, खुद अच्छे-से रहना!
बिना बातचीत के रहते नहीं हैं खामोश मगर
ज़बान और कान से भी मत कच्चे-से रहना!
सदा रणचंण्डी/रुद्र बनके ज़ीने के माने नहीं
बन जाएं वरिष्ठ तो याद रखें, जच्चे-से रहना!
बैड ब्वॉय हर्गिज न कहना चाहिए किसी को
जितना हो सके, सदा अच्छे-बच्चे-से रहना!
जमाना बीपी और शुगर का आया है जनाब
जरा बचकर के गोल गप्पे,रस गुल्ले-से रहना!
बढ़ती गई उम्र तो क्या हुआ, रहे खुशमिजाज
घूमे झूमे नाचे गाये,सदा बल्ले बल्ले-से रहना!
मन भाये सो करना चाहिए दिल से 'अर्जुनजी'
मगर चाहिए जिंदगी तो ना निठल्ले-से रहना!
प्रो. (डॉ.) अर्जुन चव्हाण,कोल्हापुर,महाराष्ट्र
(समस्त विश्व-वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित!)
(भोपाल-कोल्हापुर यात्रा, 21/08/2026)

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