श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

ग़ज़ल का स्वर : वरिष्ठ नागरिक के तर्ज पर

प्रो. (डॉ.) अर्जुन चव्हाण

कविता22/8/20261 मिनट पढ़ने का समय

ग़ज़ल का स्वर : वरिष्ठ नागरिक के तर्ज पर

तन जैसे भी हो,मगर मन से बच्चे-से रहना,

लोग जैसे भी रहते हो, खुद अच्छे-से रहना!

बिना बातचीत के रहते नहीं हैं खामोश मगर

ज़बान और कान से भी मत कच्चे-से रहना!

सदा रणचंण्डी/रुद्र बनके ज़ीने के माने नहीं

बन जाएं वरिष्ठ तो याद रखें, जच्चे-से रहना!

बैड ब्वॉय हर्गिज न कहना चाहिए किसी को

जितना हो सके, सदा अच्छे-बच्चे-से रहना!

जमाना बीपी और शुगर का आया है जनाब

जरा बचकर के गोल गप्पे,रस गुल्ले-से रहना!

बढ़ती गई उम्र तो क्या हुआ, रहे खुशमिजाज

घूमे झूमे नाचे गाये,सदा बल्ले बल्ले-से रहना!

मन भाये सो करना चाहिए दिल से 'अर्जुनजी'

मगर चाहिए जिंदगी तो ना निठल्ले-से रहना!

प्रो. (डॉ.) अर्जुन चव्हाण,कोल्हापुर,महाराष्ट्र

(समस्त विश्व-वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित!)

(भोपाल-कोल्हापुर यात्रा, 21/08/2026)

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