श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

कुछ ऐसी बारिशें…

कविता राजपूत

कविता22/8/20261 मिनट पढ़ने का समय

कुछ ऐसी बारिशें…

इन बारिशों का क्या है

मौसम के साथ आती हैं

और चली जाती हैं...

कुछ ऐसी भी बारिशें होती हैं

जो कभी नहीं बरसतीं।

उन बारिशों का क्या करें हम,

जो सदियों से अंतस में

रुकी हुई हैं...

जज़्बातों के बादल

खूब घिर आते हैं,

पर बरसने से डरते हैं।

हज़ारों बादलों की भीड़

अब भी मौजूद है

मन के एक-एक कोने में,

चाहते तो हैं वे बरसना,

हल्का होना...

मगर बरसने का अंजाम जानते हैं।

क्योंकि ये बारिशें

मामूली नहीं, हल्की नहीं

ये बहुत भारी हैं,

सैलाब लाने वाली हैं।

कभी बरस भी गईं

तो सब कुछ बहाकर ले जाएँगी।

सब्र का बाँध टूट जाएगा

और हर तरफ़

तबाही ही तबाही होगी।

इसलिए

कुछ ऐसी बारिशों का

न बरसना ही बेहतर होता है...

कविता राजपूत 🌷🌷

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