श्री देशना संग्रह
सजल
डॉ वीरेंद्र सिंह कुसुमाकर राष्ट्रीय कवि प्रयागराज
कविता•21 अगस्त 2026•1 मिनट पढ़ने का समय
धर्म सनातन प्राण हैं,
दशरथनंदन राम|
जनमन के आराध्य हैं,
सभी गुणों के धाम!!
उच्चादर्श चरित्र हैं,
रघुकुलमणि रघुनाथ !
वीर धनुर्धर राम को,
शत-शत बार प्रणाम!!
जनमानस के भाल का,
चंदन हैं रघुवीर |
वंदन प्रभु का कीजिए,
काम कोटि छवि धाम!!
मर्यादा आदर्श के,
राम दिव्य प्रतिमान !
राघवेंद्र को शत नमन,
अनुपम कीर्ति ललाम!!
नमन! नमन! रघुवर नमन!
प्रभुवर! दीनानाथ!
बसो ह्रदय सिय के सहित!
रघुकुल भूषण राम!!
