श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

ग़ज़ल

डॉ. गीता पाण्डेय "अपराजिता"

कविता21 अगस्त 20261 मिनट पढ़ने का समय

किसी को गले से लगा कर तो देखो।

कभी पास में तुम बिठा कर तो देखो।

महक तब उठेगा जिगर का ये कोना,

कदम इस तरफ तुम बढ़ाकर तो देखो।

बरसने लगेगी खुदा की भी रहमत,

गरीबों की थाली सज़ाकर तो देखो।

तुम्हारे यहांँ हर दिवस हो दिवाली,

चरागे सुख़न इक जलाकर तो देखो।

बनेगा दिवाना ज़माना तुम्हारा,

मुहब्बत का प्याला पिलाकर तो देखो।

चमन सा महकने लगे घर तुम्हारा,

गुलिस्तां अमन का खिलाकर तो देखो।

बदल जाए गीता ये किस्मत तुम्हारी,

दिलों में भलाई जगाकर तो देखो।

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