श्री देशना
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बरसात लिख रही, एक नई प्रेम कहानी

28 जुलाई 2026

लेखक: Neelam Jain

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बरसात लिख रही, एक नई प्रेम कहानी

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उर में हिलोरें आशा-उमंग,

धरा हुई संसर्ग-सुगंधित।

बूँद-बूँद में जीवन-दर्शन,

कण-कण आनंद-दीप्त प्रफुल्लित।

भाव-भंगिमा प्रणय-रंजित,

दिशा-दिशा खिली तरुणाई।

बरसात लिख रही, एक नई प्रेम कहानी।।

नवल-धवल परिवेश सजा,

रिमझिम गाए मधुर तराने।

मेघ-दामिनी का संवाद,

गर्जन रचे प्रकृति-अफसाने।

तप्त धरा के व्याकुल प्राण,

पाएँ नव जीवन की रवानी।

बरसात लिख रही, एक नई प्रेम कहानी।।

पेड़-पौधे, वन, जीव-जगत,

हर्षित हरितिमा का विस्तार।

रज-रज में उल्लास उमड़ता,

पल्लव-पल्लव नव श्रृंगार।

हल की रेखाएँ धरती पर,

रचतीं सुकाल की अमिट निशानी।

बरसात लिख रही, एक नई प्रेम कहानी।।

जीवन हो मस्त मलंग-सा,

सकारात्मक हों आचार-विचार।

दुःख, विषाद, निराशा मिटें,

खिल उठे आनंदित संसार।

प्रकृति प्रेयसी बाँह पसारे,

जगे मिलन की आस सुहानी।

बरसात लिख रही, एक नई प्रेम कहानी।।

कुमार महेंद्र

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