श्री देशना संग्रह
सीता की विदाई
28 जुलाई 2026
लेखक: Neelam Jain
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सीता की विदाई
आज जाती सिया ससुरार
अखियां बरसन लगीं ।
तात जनक के हृदय की पंखुरी ,
मात सुनैना के नैन की पुतरी ।
आज जाती छोड़ घर द्वार,
अखियां बरसन लगीं ।
मात पिता के हृदय दहकते ,
प्रिय सखियों के नयन बरसते ।
बिलख रहा सखियों का प्यार ,
अखियां बरसन लगीं ।
किए जनक जी सुता समर्पित ,
मां ने की ममता भी अर्पित ।
लो न्योछावर है सखियों का प्यार ,
अखियां बरसन लगीं ।
दो हृदयों का पावन बंधन ,
दो कुल का सादर अभिनंदन ।
जुड़ा मिथिला अवध का तार ,
अखियां बरसन लगीं ।
बड़े जतन से सिया को पाला,
यह मेरी तुलसी की माला ।
राम थाती लें अपनी संभार
अखियां बरसन लगीं ।
जा बेटी तुम सुख से रहना ,
सास ससुर की सेवा करना ।
तुमसे होगा महल उजियार
अखियां बरसन लगीं ।
डॉ वीरेंद्र सिंह कुसुमाकर
करछनाप्रयागराज
