श्री देशना
───── ✦ ─────
← सभी लेख

श्री देशना संग्रह

सीता की विदाई

28 जुलाई 2026

लेखक: Neelam Jain

───── ✦ ─────

सीता की विदाई

आज जाती सिया ससुरार

अखियां बरसन लगीं ।

तात जनक के हृदय की पंखुरी ,

मात सुनैना के नैन की पुतरी ।

आज जाती छोड़ घर द्वार,

अखियां बरसन लगीं ।

मात पिता के हृदय दहकते ,

प्रिय सखियों के नयन बरसते ।

बिलख रहा सखियों का प्यार ,

अखियां बरसन लगीं ।

किए जनक जी सुता समर्पित ,

मां ने की ममता भी अर्पित ।

लो न्योछावर है सखियों का प्यार ,

अखियां बरसन लगीं ।

दो हृदयों का पावन बंधन ,

दो कुल का सादर अभिनंदन ।

जुड़ा मिथिला अवध का तार ,

अखियां बरसन लगीं ।

बड़े जतन से सिया को पाला,

यह मेरी तुलसी की माला ।

राम थाती लें अपनी संभार

अखियां बरसन लगीं ।

जा बेटी तुम सुख से रहना ,

सास ससुर की सेवा करना ।

तुमसे होगा महल उजियार

अखियां बरसन लगीं ।

डॉ वीरेंद्र सिंह कुसुमाकर

करछनाप्रयागराज

टिप्पणियाँ