श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

हे राम हे राम सियाराम

आलेख2/2/20261 मिनट पढ़ने का समय

 हे राम हे राम सियाराम

हम रहे बन के बनवासी

हमारी है अलग पहचान

मिलकर बन गए बनवासी

मिलकर बन गए बनवासी ।।


चौदह बरस बनवास मिला 

पहाड़ जंगलों में चलते रहे

लचमण सीता मा भी भटके        

कंद मूल फल खाते जीते

जमके मिल गए हम बन वासी 

बन गए साथी राज राम के।।


राजा राम का सेवा करेंगे

मिल गया हमको राज सहारा

ये जीवन है धन्य हमारा

सदैव भक्तिभाव रहेगा

बस श्री राम कहते रहेंगे

सदैव भक्तिभाव रहेगा

बस श्री राम कहते रहेंगे।।


कौन लेगाया ना रही माता

जंगल गूंजा दुख में तेरा

एक पत्नीको ढूंढ ता फिरा

छोड़ के चले फिर आयेंगे

वानर सेना खोजते निकले

साथ देते हमे कुछभी बताते।।


दुष्ट को शिक्षा धरम की रक्षा

फिर आए वादा निभाने

चरणों में दिन रात जपेंगे

श्री राम जय राम राजा राम

चरणों में दिन रात जपेंगे

श्री राम जय राम राजा राम।।


डा कुमुदासुशील

शिवमोगा कर्नाटक

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