श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

यह कोशिश सौ बार किया है ।

18 अक्टूबर 2022

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जग से ऐसा प्यार किया है
तलवारों की धार जिया है ।

जितने प्याले मिले गरल के
हँस-हँस बारंबार पिया है । 

घाव छिपाकर सुमनों   वाले 
काँटों  से अभिसार किया है ।
 
झूठों के  मुँह  सच  दे    मारूँ 
 यह कोशिश सौ बार किया है ।

आँसू  पोंछे  नम   आँखों  के
यों गलती हर बार किया  है ।

नागफनी   बाँहों  में   देकर 
उसने कहा  बहार  दिया है।

गले    लगाते  गर्दन    गायब
 क्या वाजिब व्यवहार किया है।
@गुणशेखर

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