श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

माँ

आलेख10/5/20201 मिनट पढ़ने का समय
 















*"माँ"*

 

पतझड़ में बहार,

प्रकृति का उपहार,

मान का मान,

शीतल बयार,

ठण्डी फुंहार,

मन की मनुहार है मां।

 

हीवडें हूंकार,

प्राणों की प्राण,

मन चाही मुराद,

स्वर्ग का श्रंगार,

मन शुद्ध सार,

जीवन धन,

प्राणाधार है मां।।


 

 



 



 















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