श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

कर्जदार

10 नवंबर 2022

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प्यार-दुलार-ज्ञान की गंगा,

ईश्वर-माता-पिता-गुरु ।

जिनके अद्भुत त्याग-प्रेम को,

कहो कहाँ से करूँ शुरू ।।

निधि अनूठी बड़ी ही अनुपम,

जिनका कोई मोल नहीं ।

तबाह यूँ ही हो जाये जीवन,

लेकिन इसका तोल नहीं ।।

जो भी किया समर्पण उसका,

मूल्य चुका न पाओगे ।

कितने भी लो जन्म भले ही,

मुक्त नहीं हो पाओगे ।।

कैसा भी हो धुला दूध का,

कितना भी होगा खुद्दार ।

ॠण चुका न पायेगा वो,

बना रहेगा कर्जदार ।।

 बृजेन्द्र सिंह झाला"पुखराज")

                कोटा (राजस्थान)

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