श्री देशना संग्रह
24 जनवरी 2026
राजस्थान की पुण्यभूमि मारवाड़ सदियों से त्याग, तपस्या, सेवा और परोपकार की अनुपम परंपरा की साक्षी रही है। इस धरती ने ऐसे अनगिनत सपूत जन्म दिए हैं जिन्होंने जन्मभूमि के ऋण को अपने जीवन का धर्म मानकर चुकाया। यही संस्कार जैन समाज की आत्मा हैं, जिसके कारण प्रवासी राजस्थानी आज भी अपने गाँव, कस्बों और मातृभूमि से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। मारवाड़ के गाँवों, कस्बों और नगरों में बने चिकित्सालय, आयुर्वेदिक अस्पताल, विद्यालय, महाविद्यालय, धर्मशालाएँ, गोशालाएँ, पशु-चारागृह तथा कबूतर दाना-गोदाम,ये सभी उस मौन सेवा की जीवंत गवाही हैं, जो बिना प्रचार के समाज और राष्ट्र की सेवा में समर्पित रही है। इन निर्माण कार्यों ने न केवल जन-जीवन को सुविधा दी, बल्कि नई पीढ़ी के मन में भी सेवा और कर्तव्य का बीज बोया है।
मिट्टी से लगाव या प्रेम-एक प्रेरक दस्तावेज
इसी महान परंपरा को अक्षुण्ण रखने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से JAINS INDIA TRUST द्वारा “मिट्टी से लगाव या प्रेम” नामक एक प्रेरक पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है। यह पुस्तक उन प्रवासी राजस्थानी परिवारों को सम्मानित करेगी जिन्होंने अपनी जन्मभूमि पर अस्पताल, स्कूल, गोशाला, जल-संरचना, धर्मशाला या अन्य जनकल्याणकारी निर्माण कर समाज के प्रति अपने कर्तव्य को निभाया है। हमारा प्रयास केवल इतिहास दर्ज करना नहीं, बल्कि उन पुण्यात्माओं को उचित मान-सम्मान देना है जिनकी सेवा-भावना ने गाँवों को संवारा और समाज को दिशा दी। यह ग्रंथ आज की पीढ़ी को बताएगा कि सच्ची समृद्धि वही है जो समाज के कल्याण से जुड़ी हो।
आपका सहयोग-इस पावन यज्ञ में आहुति
आपसे सादर अनुरोध है कि यदि आपके परिवार अथवा आपके किसी परिचित द्वारा पाली जिले की सोजत तहसील की जन्मभूमि पर अस्पताल, विद्यालय, धर्मशाला, गोशाला, जल-स्रोत या अन्य कोई जनहितकारी निर्माण कार्य करवाया गया हो, तो उसकी जानकारी हमें अवश्य प्रदान करें। कृपया सेवा-कार्य का विवरण, निर्माण का वर्ष, अनुमानित लागत, दानदाता परिवार का नाम, वर्तमान निवास स्थान, परिवार के सदस्यों की जानकारी तथा उपलब्ध फोटो हमें भेजें। आपका यह सहयोग इस ऐतिहासिक प्रयास को पूर्णता देगा।
शुरुआती चरण में हमें पाली जिले के सोजत उपखंड के गाँवों का ब्यौरा 10-1-26 कों साझा किया गया था ।
आपकी भेजी हुई प्रत्येक जानकारी केवल एक विवरण नहीं,बल्कि किसी पुण्य आत्मा की सेवा-गाथा होगी। इस महाग्रंथ के माध्यम से वह गाथा सदा-सदा के लिए सुरक्षित हो जाएगी।
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