श्री देशना संग्रह
सार्थक कर-
11 जनवरी 2026
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सार्थक कर-
दौलत से नहीं आता गम या खुशी का दौर
मंन का फितूर है ये
मन की संभाल कर,
अमीरी की दौड़ में
रिश्ते न तोड़ दे
बिकते नहीं बाजार में
रिश्ते संभाल रख ,
प्रेम से बढ़कर
न भाव कोई है
कम न हो किसी से
बांट दे जी भर कर,
न भर तिजोरियों में
लेकर न जाएगा
कोई नहीं है तेरा
न किसी को मर,
कर्म का प्रतिफल मिलता अवश्य है
छिपाने से न छिपेगा
दुष्कर्म से तू डर,
कुछ पल सुकून से
अपने लिए भी जी
छोड़ मृग मरीचिका
सवाल खुद से कर,
जीना है चार दिन का
अपनी तरह से जी
अंत:का अमृत पी
खुद से खुदाई कर,
जिसने पिया वो जिया
जो न पिया, क्या जिया
अब जो बचा बचाले
जनम सार्थक तो कर।
मीना गोदरे, अवनि
