श्री देशना
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दशलक्षण महापर्व शुरू हो रहे हैं,

7 सितंबर 2021

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 दशलक्षण महापर्व शुरू हो रहे हैं,

दस दिन क्या करे?

तो आओ हम सब अपनी शक्ति और परिणामों को शुद्ध करे और दस दिन संयमित जीवन जीने का प्रयास करें।

👉रात्रि भोजन का त्याग।

👉रात्रि अन्न जल आदि सबका त्याग।

👉बाजार की मिठाई,नमकीन, बिस्किट आदि सबका त्याग क्योंकि अशुद्ध अनछाने पानी से बनता है।

👉दिन में कम से कम १ घंटे का स्वाध्याय।

👉प्रतिदिन मंदिरजी जाकर जिनदर्शन,भक्ति,पूजा करना।

👉सिनेमा,टेलीविजन नहीं देखना।

👉हरी सब्जियों का त्याग।

👉चार महादान(शास्त्र दान,अभय दान आदि) में से कोई भी एक दान रोजाना या जितना हो सके करना।

👉पाँचों पापों का यथाशक्ति त्याग करना।

👉जितना हो सके जिनधर्म की प्रभावना करना।

👉कषाय रहित परिणाम रखना।

👉एकाशन या पूर्ण व्रत या जितना हो सके।

👉इन्द्रियों को अपने Control में रखने का हरसंभव प्रयास।

👉हमेशा धर्म के कार्यों में संलग्न रहना।

👉व्यापारादि कम से कम करना,यदि हो सके तो ना करना।

👉ज़मीन कंद कन्दमूल आदि वस्तुओं का त्याग

👉रोजाना एक घंटे का मौनव्रत

👉हर दिन एक घंटे मोबाइल का त्याग(जाग्रत अवस्था में अर्थात जागते हुए ही)

👉चमड़े इत्यादि की वस्तुओं का त्याग

👉भोजन में झूठा ना छोड़े

👉सभी प्रकार के अचारों का त्याग

👉वाहनों का सीमित उपयोग

👉हरी वनस्पति पर चलने का त्याग

👉जितना हो सके धर्ममय प्रवृति रखना।

👉पाँच अणुव्रतों का यथाशक्ति पालन करना।

👉तीन गुणव्रत व चार शिक्षाव्रत का यथाशक्ति पालन करना।

👉गमन करने की व परिग्रह की यथाशक्ति सीमा बाँध लेना 

👉प्रत्येक धर्म को अंगीकार करने का प्रयास करना।

👉ये दस धर्म नहीं बल्कि धर्म के दस लक्षण है।इसीलिए वस्तु के स्वभाव धर्म को जानकर ज्ञाता दृष्टा रहने का पुरुषार्थ करना।

👉अपना ज्ञाता दृष्टा स्वरूप समझकर कर्तत्व बुद्धि को छोड़कर धर्म के दस लक्षणों को ध्याना।

👉किसी भी नियम की मर्यादा को यथाशक्ति कम या ज्यादा किया जा सकता है।

👉१० दिन तत्वार्थ सूत्र पढ़े और सबको शीघ्र ही तत्वज्ञान हो तथा हम भेदज्ञान करके इस भवसमुद्र को पार करें।इसी मंगल भावना के साथ आप सबको दशलक्षण पर्व की शुभकामनाएँ।

🔴मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान होता है~भगवान महावीर स्वामी जी


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