श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

'वसंतपञ्चमी'/'वसंतपंचमी'/'वसंत-पंचमी की परख व्याकरणीय धरातल पर

23 जनवरी 2026

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     ज्ञानदायिनी शक्ति 'सरस्वती' की आराधना 'वसंतपंचमी'-पर्व का वैशिष्ट्य (विशेषता) है। वस्तुत:/वास्तव मे) सरस्वती 'कला' और 'साहित्य' ('राहित्य' का विपरीतार्थक शब्द) की देवी हैँ, जो भारतीय ज्ञानपरम्परा/ ज्ञान-परम्परा ('ज्ञान परम्परा' अशुद्ध है।) मे शीर्षस्थ (शीर्ष पर स्थित) हैँ/शीर्ष-आसन पर समासीन हैँ। ('शीर्षस्थ स्थान पर हैँ' अशुद्ध है।) हमारे पौराणिक ('पुरनिया' का तत्सम शब्द)/ प्राचीनकालीन ग्रन्थोँ मे मातुश्री (तत्सम शब्द) सरस्वती 'नागेश्वरी', 'भारती', 'शारदा', 'हंसवाहिनी', 'वीणावादिनी' इत्यादिक (यहाँ 'आदिक'/'आदि' अशुद्ध है।) नामो से विश्रुत हैँ तथा उनके माहात्म्य ('माहात्म' और 'महात्म्य' अशुद्ध हैँ।) /महिमा का अत्यन्त विस्तारपूर्वक निरूपण भी किया गया है। इसी आधार पर देश के विभिन्न भू-भागोँ मे वसंतपंचमी के अलौकिक अवसर पर माँ शारदा का अर्चन-पूजन-स्तवन-आराधन-अभ्यर्थन-अभ्यर्चन (इन समस्त शब्दोँ के अर्थ, आशय और अवधारणा मे अन्तर है।) अतीव आस्था (यहाँ 'विश्वास' अशुद्ध है।) और श्रद्धापूर्वक किया जाता है। यही कारण है कि 'वसंतपंचमी' का आयोजन भगवती ('भगवत्' का स्त्रीलिंग) सरस्वती को 'सारस्वत'

समारोह के रूप मे समर्पित रहता है।

      शुद्धाशुद्ध-गवेषणा और विवेचन के अनन्तर/पश्चात् (यहाँ 'उपरान्त' अशुद्ध है।) अब आइए! 'वसंतपंचमी' का व्याकरणिक ज्ञान/बोध प्राप्त करेँ। 

    'वसंतपंचमी' मे दो शब्द हैँ :– 'वसंत' और 'पंचमी'। हम पहले 'वसंत' शब्द पर दृष्टिपात/दृष्टिनिक्षेपण करेँगे/आँखेँ/दृष्टि स्थिर करेँगे। यह 'वस्' धातु का शब्द है, जिसमे 'झच्' प्रत्यय जुड़ा हुआ है। इसप्रकार 'वसंत' शब्द का सर्जन होता है। हेमन्त और ग्रीष्म के मध्य की ऋतु 'वसंत' है। अब 'पंचमी' का संज्ञान/सम्बोध करते हैँ। ('संज्ञान लेते' और 'संबोध करते' अशुद्ध हैँ।) 'पंचम' शब्द मे 'ङीष्' प्रत्यय के जुड़ने से 'पंचमी'-शब्द ('पंचमी शब्द' अशुद्ध है।) की उत्पत्ति होती है। ('पंचमी शब्द का निर्माण होता है' अशुद्ध है।) चान्द्रमास (चन्द्रमा से सम्बन्धित मास) के प्रत्येक पक्ष की पंचम/ पाँचवीँ तिथि 'पंचमी' कहलाती है। इसप्रकार 'वसंतपंचमी' का आशय हुआ– 'माघमास की शुक्लपंचमी'। इसे 'श्रीपंचमी' ('श्रीपंचमी' एक पूर्ण शब्द है, अत: 'श्री' और 'पंचमी' पृथक्-पृथक् नहीँ लिखे जायेँगे। जैसे– 'श्री पंचमी'। यदि आप 'वसंतपंचमी' को अलग-अलग करके 'वसंत पंचमी' लिखते हैँ तो ('यदि' के साथ 'तो' का ही प्रयोग होगा, 'तब' का नहीँ; 'जब' के साथ 'तब' का व्यवहार किया जायेगा।) आपका लेखन अशुद्ध माना जायेगा। 'वसंतपंचमी' षष्ठी तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जिसका अर्थ है, 'वसंत की पंचमी तिथि'। 

   आप इसे शुद्धतापूर्वक तीन प्रकार से लिख सकते हैँ :– 

(१) वसंतपञ्चमी 

(२) वसंतपंचमी 

(३) वसंत-पंचमी।

    

    आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; 

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