श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

बन्द मुट्ठी

आलेख11/4/20201 मिनट पढ़ने का समय





बन्द मुट्ठी

 

मुट्ठियाँ क्यों 

बन्द है इंसान की,

जाने से पहले 

एक बार तू खोल दे।

तोड़ कर

नफ़रतों के दायरे

बन के इंसान

इंसानियत का तू मोल दे।

धर्म मज़हब की

हदों को छोड़ कर

ह्रदय तराजू

प्रेम को तू तोल दे।

                      प्रीत


 

 



 



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