श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

रंगों से सजी रंगोली

14 मार्च 2022

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 रंगों से सजी रंगोली 

समरसता है रंगों की

तू भी मिल मैं भी मिलु

ये सरसता हमजोली की।

            2

तन - मन का मेल हो जाए

जीवन एक स्वप्न खेल हो जाए

भावना भांग - सी घुल जाए

मन-प्रेम का नशा चढ़ जाए।

              3

शब्दों की पिचकारी मिले

हर मन नहलाए हम सब

साफ करे जाति भेद- पंक को

कुछ रंग अलग चढा़ये सब।

                4

राग द्वेष का कपूर बनाकर

होम करेंगे होली में 

स्वच्छ बनेगे भाव-गगन के 

हिंदू संस्कृति झोली में। 

               5

मृदंग बने फागुन की मस्ती

भंवरों का उसमें गान हो जाए

नव पल्लव नव कुसुम भी नाचे

बसंती बहारों का जाम हो जाए। 

                6

नीली पीली हरी गुलाल का

सतरंगी सुबह शाम हो जाए

मै भी मिलु तू भी मिले 

ये चर्चा चहुँ आम हो जाए। 


                     रूपनारायण'संजय

                     कोटा, राजस्थान

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