श्री देशना संग्रहजीवनआलेख•28/9/2021•1 मिनट पढ़ने का समय📖Reading Mode↗Shareजीवन सच में है वही, आए परहित काम,अपने हित को जो जिए , बस जीवन है नाम।बस जीवन है नाम , निरर्थक साँसें लेते ,नदियाँ बादल वृक्ष , सभी फल परहित देते।नहीं भले हों काम , कहो फिर कैसा ये धन?मिले घना यश-मान, जिएं जो परहित जीवन।। डॉ० शिशुपालटिप्पणियाँटिप्पणी भेजें
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