श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

जब से जन्मा

27 दिसंबर 2025

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जब से जन्मा

उसी दिन से

मैं प्रकृति के पास हूँ।


सूर्य का 

कटलेट खाना

चाँद का चखना

'मलइयो'

भोर की

ठंडी हवा की

गंध की लेना

'बलइयो'

ओस की

बूँदें बिछौना 

मैं धरा की घास हूँ।


खुले गाँवों

की गली के

पास से होकर गुजरता 

दूर खेतों

के बबूलों

के तनों चढ़ता-उतरता

सड़क से

पगडंडियों तक

नृत्य कत्थक-रास हूँ।


पर्वतों की

चोटियों से 

मैं धरा को झाँकता

और नदियों 

के निकट से

गगन का मन आँकता

साँस की

अंतिम पहेली

का टहलुआ-दास हूँ।


शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'

          वाराणसी

    

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