श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

प्यासा सा समंदर है वह

4 जुलाई 2020

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प्यासा सा समंदर है वह

 

 

सभी नदियां मिलें जिसमें,प्यासा सा समंदर है वह।

जीतने निकला जो सारे जहां को,हारा सा सिकन्दर है  वह।।

 

पेड़ों पर कूद-कूद कर खाता रहा था  फल जो।

अब न पेड़,न कहीं फल हैं,खिसियाया सा बंदर है ।।

 

जिम्मेदारियां नचा रहीं उसको रात और दिन ।

नचाने को न भालू हैं,न बंदर हैं,मगर फिर भी कलंदर है वह।।

 

न जाने क्या सोचता-समझता है या है नादान ।

अड़ौसी-पड़ौसी और घरवाले हैं कहते बवंडर है वह।।

 

कोरोना महामारी 'सुषमा 'है आयी,लायी है कयामत ।

बहुत घूमता था इधर से उधर,आज अंदर है वह।।


 

 



 



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