श्री देशना संग्रह
मुक्तक
29 जनवरी 2026
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युगो युगो से शिला बन गई मैं अभिशापित हूं|
इंद्रदेव से छली गई हूं मैं संतापित हूं|
कोई कामी छद्म वेश मे फिर ना छल कर पाए
मुझे शिला ही रहने दो प्रभु मैं अपमानित हूं||
डॉक्टर वीरेंद्र सिंह कुसुमाकर प्रयागराज
