श्री देशना संग्रह
मुक्तक
28 अक्टूबर 2020
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मुक्तक सुना है नया चुनाव आया है। प्रजातंत्र में तूफान आया है। रैली के पर सुर्खाब लगे हैं । वायदोंका संसार आया है । सफेद कपड़ो की मांग बढ़ी है। गांधी टोपी सिर चढ़ी है । आसमान कदमों पर होता था। अब तले जमीन खिसकी पड़ी है। गली गली बंदरवार सजे हैं। ढोल नगाड़े जोरो बजे हैं । लगे हैं कोई त्यौहार आया है। जनता के देखो बहुत मजे हैं। नेता जी से मिलने जब जाते। पसीने से सरोबार हो जाते । अब यहां ऊंट पहाड़ के नीचे हैं। हाथ जोड़े जन-जन को लुभाते।। विकास का सपना दिखाते हैं। विकास पीछे खुद भाग जाते हैं। अबकी जो झूठों की बहार है। कुर्सी दौड़ कौन जीत पाते हैं । चंद्र किरण शर्मा, भाटापारा। |
