श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

हौसला

डॉ सुषमा सेंगर

कहानी27/8/20262 मिनट पढ़ने का समय

हौसला

उसका रोज का काम था,सुबह 5 बजे उठना,घर के काम निपटाना उसके बाद हाथ में हँसिया और गोद में बिटिया को लेकर चल देती गाय के लिए घास काटने।ग्रामीण कमजोर लोगों का यही काम होता है पुरुष मज़दूरी करते हैं और महिलाएँ घर के काम के बाद अपने जानवरों के लिए चारा और चूल्हे के लिए लकड़ी का इंतज़ाम करतीहैं ।

आज फिर वो अपने मिशन पर निकल पड़ी।

खेत की मेड़ पर पुरानी साड़ी बिछाकर बेटी को लिटाया और लगी घास काटने। हँसिया चलाते हुए वो एक नज़र अपनी बेटी पर भी रखती जा रही थी ।

पाँच मिनट ही बीते थे कि जंगल से भेड़िया निकला और बेटी को खींचकर ले जाने लगा।

बेटी की चीख सुनकर उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसकी भी चीख निकल गयी।

पर उसने हिम्मत नहीं हारी, हँसिया लेकर सीधे भेड़िये के गले पर वार कर दिया।

अचानक हुए हमले से भेड़िया घबरा गया और बेटी को छोड़कर उसकी तरफ लपका।

भेड़िये का मुँह खुला देखकर उसने हिम्मत करके हँसिया उसके मुँह में मार दिया।

भेड़िया जान बचाकर भागा और वो बच्ची लेकर।

सही समय पर सही निर्णय ने माँ और बेटी दोनों को अलग होने से बचा लिया।

माँ का हृदय अभी भी जोर ज़ोर से धड़क रहा था ।

घर के आसपास के भेड़ियों से बचाने के लिए साथ लेकर आती थी ,उसे पता नहीं था कि खेत में जंगल का भेड़िया भी बच्ची की फ़िराक़ में टहलता रहता है ।

डॉ सुषमा सेंगर

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